बुरखा पहनाने की जिद करने वाली की fir नही होगी रद्द
हाई कोर्ट ने सुनाया कठिन फैसला
Author
Lalit Shishodia
Published
17 April 2026
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने १२ कक्ष की स्टूडेंट्स की फिर रद्द करने से मना कर दिया है। इन दोनों पर आरोप लगाया गया था कि जबरन बुरखा पहनने को मजबूर करना और धरम परिवर्तन करने के लिये दबाव बनाना। अपने आदेश में जस्टिस jj मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने युवाओं द्वारा दूसरों पर अपना धरम/मान्यता थोपना को परेशान करने वाला चलन बताया है। कोर्ट ने कहा " हमें इस स्थिति के प्रति सचेत रहना चाहियें की २०२१ का अधिनियम समाज में उत्पन्न हो रही ऐसी स्थिति को रोकने के लिये बनाया गया है, जिसमे कुछ लोग अपनर धरम का प्रचार/प्रसार नही करते बल्कि उसे दूसरों पर थोपते हैं। अगर युवाओं में इस तरह का रुझान देखने को मिलता है तो यह और भी चिंताजनक है। यह एक ऐसी प्रवित्ती है जीसे यूपी गैर-कानूनी धर्मांतरण निसेध अधिनियम २०२१ के माध्यम से रोकने के निसेध अधिनियम २०२१ के माध्यम से रोकने का प्रयास किया गया ।" कोर्ट को लगा की इसमे गहन जांच की जरूरत है। ये fir मुरादाबाद में हुई है।
