तविषा का दुबारा पोस्टमार्टम हुआ
मौत से पहले क्या हुआ था?
Author
Lalit Shishodia
Published
24 May 2026
तविषा मौत से पहले ब्यूटी पार्लर गई थी। उसने वाक किया, फिर फांसी लगा ली। पट्टी की बातें संदेह में है, इसलिए दुबारा पोस्ट मार्टम कराया गया। अ ) हत्या आरोपी पति वकील सिंह का कहना है कि समर्थ सिंह को ७ दिन की पुलिस रिमान्ड में भेजा गया हैं। उसने बताया है कि तविषा की मौत से पहले क्या क्या हुआ था ?
ब ) तविषा के परिवार की मांग पर दिल्ली के एम्स के doctors की टीम ने भोपाल आकार शव का दुबारा पोस्ट मार्टम किया, उसके बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
क) सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का श्वतः संज्ञान लेकर २५ मई को सुनवाई तय की है। हत्या आरोपी पट्टी ने मौत के १० दिन बाद २२ मई को जबलपुर में सरेन्डर किया, रात २ बजे के बाद भोपाल पुलिस समर्थ को भोपाल लेकर आयी। २३ मे को भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने समर्थ को ७ दिन की पुलिस रिमान्ड पर जेल भेज दिया। समर्थ के मुताबिक, शादी के बाद दोनों के रिश्ते ठीक थे, १७ अप्रैल २०२६ को तृषा को pregnenci का पता चला, इसके बाद दोनों के रिश्ते खराब होने लगे। तविषा का कहना था की वह घेरलु जिंदगी नहीं जीना चाहती, वह ग्लैमर दुनिया के लिये बनी है, वह घर जाना चाहती है, ओर वह नोएडा अपनी फॅमिली के पास पहुँच जाती है।
काफी समझाने के बाद, तविषा अपने माँ और भाई के साथ २३ अप्रेल को भोपाल लौटी। २४ अप्रेल को तविषा और समर्थ को बेंगलुरू जाना था लेकिन बाद में तविषा ने मना कर दिया। २४ अप्रेल को तविषा अजमेर अपने भाई के पास आती है। एक दिन रुकने के बाद वह दिल्ली चली जाती है और फिर ३० अप्रैल को भोपाल आ जाती है।
१२ मई को तविषा शाम ६ बजे ब्यूटी पार्लर से आती है, तविषा और समर्थ दोनों घर के सामने के पार्क में ७:३० बजे तक टहलते है, दोनों ने साथ खाना खाया, और फिर ८:३० बजे कमरे में गए और टीवी देखने लगे।
कुछ समय बाद तविषा नीचे कमरें में चली गई, और जहां वह अपने माता-पिता से बातें कर रही थी, समर्थ सो जाता है। कुछ देर बाद माँ समर्थ से फोन करके कहती हैं की तविषा कहीं दिखाई नहीं दे रही है और कॉल भी नहीं उठा रही है।
इसी बीच तविषा की माँ का भी फोन आता है कि तविषा परेशान है, और रो रही है। उसे जाकर देख लो, इस पर समर्थ ने कहा की वह अपनी माँ से बात करने छत पर गई होगी। वहाँ जाकर देख लो।
माँ जब छत पर पहुंची, तो उन्होंने देखा कि तविषा ने excercise होने वाली बेल्ट से फांसी लगा ली है। शोर सुनकर समर्थ भी वहाँ पहुंचा और और तृषा को उतारा।
इसके बाद पडोसे से मौसी के बालक बुला लिये, समर्थ ने तविषा को सीपीआर भी दिया लेकिन जब तक देर हो चुकी थी। इसके बाद तीनों ने एम्स पहुंचे, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
हालांकि समर्थ की इस कहानी पर बहुत से सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनमे कुछ इस प्रकार हैं, a ) भोपाल के एम्स की पहली पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, तृषा के शरीर पर मौत से पहले कुछ चोट के निशान थे। इनमे गार्डन पर बाईं तरफ खरोंच के निशान, बाएं हाथ, बाएं हाथ की कलाई के ऊपर, दायें हाथ की कलाई, दायें हाथ की चोटी उंगली और खोपड़ी के नीचे खरोंच के निशान है। अगर तविषा ने आत्महत्या की तो फिर उसके शरीर पर निशान कैसे आए। b) जिस जिम बेल्ट से फंदा लगने की बात कही गई है वो डॉक्टर को नहीं दी गई। तविषा के वकील के मुताबिक, उस बेल्ट का निशान गर्दन के निशान से नहीं हो सका। c ) cctv फुटेज से तविषा शाम करीब ७:३० पर छत पर गई। ८:३० पर समर्थ उसे सीपीआर देते दिखा, फिर ३ लोग उसे नीचे लाते दिख रहे हैं। जबकि मौत का टाइम fir में १०:३० बजे दिखाई गई है। अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस को खबर नहीं दी गई, तविषा की उम्र दो जगह अलग-अलग सलून से cctv फुटेज क्यूँ मांगा गया। तविषा ने मौत से पहले, ७ मई को, अपनी माँ को व्हाट्सप्प चैट पर लिखा था, समर्थ मेरी प्रेग्नेनकी पर शक करता है वो कहता की ये बालक मेरा नहीं हैं। इसके बाद ९ मे को तविषा लिखती है की माँ मुझे यहाँ से ले जाइए, ये आदमी अपने घटियापन की हर लिमिट क्रॉस कर चुका है। फिर ११ मई को तविषा लिखती है कि, ससुराल वाले मेरी उदासी छिपाने की, मुझ पर ड्रग्स का आरोप लगा रहे हैं, ये न रोने देंगे, न हसने की वजह देंगे।
दुबारा पोस्टमार्टम से कट पता चल सकता हैं? फोरेंसिक साइंस की रिसएअर्च के मुताबिक , दुबारा पोस्टमार्टम से से शरीर में कुछ बदलाव आ जाते हैं। शव पुराना होने से डिकॉमपोसे होने लगता हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील चिराग गुप्ता का कहना है कि अगर दूसरे पोस्टमार्टम से यह पता चलता है की यह आत्महत्या नहीं है। तो bns की धारा १०३ के तहत नए सिरे से मामला दर्ज होगा। सबूतों को मिटाने के लिये भी धारा २३८ और धारा २४१ के तहत मामला दर्ज होगा, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने क बाद अपराधी को जमानत मिलने में दिक्कत हो सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान क्यूँ लिया? सुप्रीम कोर्ट के cji सूर्यकांत को एक नोट भेजकर मामले की स्वतः संज्ञान लेने को कहा गया था। संभव है की पूर्व जज रह चुकी तविषा की सास के असर के चलते जांच सही तरह से नहीं हो पाई है। क सूर्यकांत त्रिपाठी ने कहा अगर किसी मामले में कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठते है तो, तो ये महज एक केस मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वनीयता पर सवाल उठाता है। इसमे आगे निम्न कार्य हो सकता है? १. सीबीआई से जांच हो सकती है। २. दुबारा पोस्टमार्टम हो, ३. आरोपी की माँ की अग्रिम जमानत रद्द कर दी जाए। ४. आरोपी की माँ, नेताओ से, अफसरों से, judje से, संपर्क किया था। cdr की जांच की जाएगी। ५. आरोपी के घर को सील करके सारे सबूत सुरक्षित किए जाएं। ६.
