भरत तिवारी केस डायरी
भरत भूषण गांव के लिए लड़ रहा था
Author
Lalit Shishodia
Published
27 June 2026

१७ जून २०२६ को बिहार के भोजपुर, में एक फैक इन्काउनर होता है, नाम है भरत भूषण। भरत भूषण पहले फेस्बूक पर लाइव आता है ओर सामने पुलिस वाले गन ताने खड़े होते हैं। पुलिस कहती है की उसकी सभी मांगे माँ ली गई हैं। उसके बाद भरत अपनी हथियार फेंक देता है, पुलिस उसकी गन उठती है। ये सब विडिओ में देखा जा सकता है। उसके बाद पुलिस उसमे ५ गोली मारती हैं, जहां चिकित्सा के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है। भरत के पिता, पुलिस के पास अपने बेटे की गन वाली शिकायत लेकर जाते हैं, और उसके पिता को सुबह से शाम तक थाने में बिठकर रखते हैं। कई बार वह मनतें करते हैं, लेकीन उन्हे नहीं छोड़ा जाता है , उसके बाद वो देखते हैं की पुलिस बुलेटप्रूफ जैकिट पहनती है। ओर बाहर चली जाती हैं। उसके बाद सूचना मिलती है की भरत भूषण मर चुका हैं। पुलिस ५ गोली मारती है जिसकी जांच में पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में भी सही पाया जाता हैं। भरत भूषण बाढ से पीड़ित अपने गाँव के लोगों के लिए कुछ सुविधा की मांग कर रहा था। जनता इसका विरोध करता है, क्योंकि एक दिन पहले ही पुलिस ने भरत को मानसिक पीड़ित बताया था। फिर मारा क्यूँ। जब बंदूक फेंक दी, तो फिर मारा क्यूँ? बिहार के मुख्य मंत्री ने ट्विटर पर लिखा की " इसको गंभीरता से लेते हुए, हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की देख रेख में उसकी जांच की जाएगी, जो भी इसके दोषी ह उन्हे बकशा नहीं जाएगा। " । वहीं गाँव वाले भी बहुत दुखी है।
